लेख संख्या 1 चुभता हुआ सत्य - क्यों भीलवाड़ा या आस-पास का व्यक्ति बाहर जाकर ज्यादा कमाता है?’’ सम्पत शर्मा सम्पादक श्रेष्ठ शिक्षा न्यूज मो. 8005609329

 आजकल का प्रसंग - लेख संख्या 1

चुभता हुआ सत्य - क्यों भीलवाड़ा या आस-पास का व्यक्ति बाहर जाकर ज्यादा कमाता है?’’  सम्पत शर्मा सम्पादक श्रेष्ठ शिक्षा न्यूज मो. 8005609329 

यह लेख थोड़ा कड़वा जरूर लगेगा, लेकिन सच्चाई अक्सर चुभती ही है।

हम बात कर रहे हैं भीलवाड़ा और उसके आसपास के क्षेत्रों की, जहाँ के लोग मेहनती तो बहुत हैं, लेकिन अक्सर अपने ही वातावरण के कारण आर्थिक रूप से पीछे रह जाते हैं।

पहला है ’’काम की जगह सामाजिकता भारी पड़ जाती है’’

हमारे क्षेत्र में जिमण (भोज), रातीजगा, गांव बाहर रोटी, रसोई और छोटे-छोटे सामाजिक कार्यक्रमों की भरमार है। हर व्यक्ति इन कार्यक्रमों में शामिल होना अपनी जिम्मेदारी समझता है। वहीं जब यही व्यक्ति गुजरात या महाराष्ट्रं जाता है, तो उसका पूरा ध्यान केवल कमाने पर होता है।

वह हर कार्यक्रम में भाग लेने के बजाय, अपने लक्ष्य को प्राथमिकता देता है।


 ’’समय की कीमत समझ में आती है बाहर जाकर’’

भीलवाड़ा में मौसम में कभी (सर्दी, गर्मी, लू) के कारण काम की गति प्रभावित होती है। कई बार लोग मौसम का बहाना बनाकर काम टाल देते हैं।

लेकिन बाहर रहने वाला व्यक्तिः

’ 10-12 घंटे लगातार काम करता है

’ समय को ही धन मानता है

यही अंतर उसकी आय को बढ़ा देता है।

🔴 ’’कम खर्च, ज्यादा बचत’’

बाहर रहने वाला व्यक्ति सीमित साधनों में जीवन जीता है।

वह दिखावे से दूर रहता है और केवल जरूरी खर्च करता है।

जबकि अपने क्षेत्र मेंः

’ शादी-ब्याह, ’ सामाजिक कार्यक्रम, ’ दिखावा

  👉 इन सब में कम खर्च के बजाय कुछ अनावश्यक खर्च होता है

जिससे कमाई होने के बावजूद बचत नहीं हो पाती।


 ’’मानसिकता का अंतर ही असली कारण है’’

बाहर जाकर व्यक्ति की सोच बदल जाती है।

वह खुद से कहता है  “मैं यहाँ कमाने आया हूँ।”

वहीं अपने क्षेत्र में वह सोचता है 

“अगर मैं नहीं गया तो लोग क्या कहेंगे?”

यही “लोग क्या कहेंगे” वाली सोच उसे पीछे रोक देती है।


 🔴 ’’अवसरों का फर्क’’

गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों मेंः

’ उद्योग,’ फैक्ट्री,’ व्यापार  👉 अधिक हैं

जबकि भीलवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में अवसर सीमित हैं, खासकर छोटे कस्बों में।

 🔴 ’’भावनाओं पर नियंत्रण’’

बाहर रहने वाला व्यक्ति हर छोटे कार्यक्रम में भाग लेने नहीं आता।

वह केवल जरूरी कार्यों के लिए ही घर लौटता है।

जबकि अपने क्षेत्र में हर निमंत्रण को अनिवार्य समझा जाता है।

👉 यही भावनात्मक दबाव आर्थिक प्रगति में बाधा बनता है।




 🔴 ’’अनुशासन और आदतें’’

बाहर का जीवन व्यक्ति को अनुशासित बना देता हैः

’ समय पर उठना, ’ नियमित काम करना

’ फालतू बैठकी से दूर रहना

जबकि यहाँ अक्सर समय गपशप और बेकार चर्चाओं में निकल जाता है।

सच्चाई यह है कि

’’भीलवाड़ा का व्यक्ति मेहनती है, लेकिन उसकी आदतें और सामाजिक वातावरण उसे पीछे खींच लेते हैं।’’

जब वही व्यक्ति इन सब से दूर जाकर केवल काम पर ध्यान देता है,

तो वह सफल हो जाता है।

 ’’चुभता हुआ सत्य’’

’’“हमारे यहाँ लोग रिश्तों में इतना उलझ जाते हैं कि समय खो देते हैं,

और बाहर जाकर वही समय संभालकर पैसा बना लेते हैं।”’’


Comments

  1. लेख अच्छा लगा
    आप ऐसे ही लिखते रहे

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